नई दिल्ली/मुंबई | विशेष धर्म समाचार
सिंधी समाज का प्रमुख पर्व चेटीचंड आज पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व सिंधी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है और भगवान झूलेलाल की जयंती के रूप में विशेष महत्व रखता है। देशभर में मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन किया जा रहा है।
मुंबई, उल्हासनगर, पुणे, दिल्ली, अहमदाबाद और जयपुर सहित कई शहरों में भव्य शोभायात्राएं निकाली जा रही हैं। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में भगवान झूलेलाल की झांकियों के साथ नगर भ्रमण कर रहे हैं। जगह-जगह धार्मिक कार्यक्रम, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। घर-घर में बहराना साहिब स्थापित किया गया है और श्रद्धालु जल स्रोतों के पास जाकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में सिंध क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर अत्याचार बढ़ गए थे। तब उन्होंने जल देवता वरुण देव से प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान झूलेलाल ने जन्म लिया और समाज को अत्याचार से मुक्ति दिलाई। इसी खुशी और आभार के रूप में हर साल चेटीचंड मनाया जाता है। यह दिन आस्था, एकता और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
पूरे देश में श्रद्धालु एक स्वर में
“अयोलाल झूल्लेलाल”
का जयकारा लगा रहे हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना हुआ है। चेटीचंड के साथ ही सिंधी समाज का नया साल शुरू हो गया है और लोग एक-दूसरे को बधाइयां देकर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।